सोमवार, 16 अक्टूबर 2017

कभी तो याद कर

कुछ शामें उधार है इस शहर की
वो चुकाने आया हूं
मै तेरे शहर में
इसी बहाने आया हूं 

मैं ना होता मैं
उनका आइना ही हो जाता
संवरने के बहाने ही सही
उन्हे मेरी याद तो आती

तेरा ख्याल

वो तेरा ख्याल ही है जो खूबसूरती ले आता है
वरना बाज़ारो मे लाली तो कब से बिका करती है

ये कमबख़्त अल्फाज़ अक्सर बिगाड़ देते है
खूबसूरती जज़्बात की
कलम को दिल से यूं मुकाबिल ना कर

कलम से एहसासो को यूं बयां ना कर
ये शौक तो आँखो के हिस्से आने दे

मुलाकात मे इस कदर ना मिलना

वो तेरे चेहरे का ही नूर था
जो हमें रोशन कर गया
वरना चाँद रातें तो कई बार देखी हमने
इतने भीतर तक उतरने की साज़िश थी तुम्हारी
वरना सिर्फ मुलाक़ात के बहाने
कोई इस क़दर नही मिलता

उस धागे मे अब भी बाकी है

उस धागे मे अब भी बाकी है
तुम्हारे लबो की थोडी सी नमी
मेरी शर्ट में बटन टांकते वक्त जिसे
झटके से खींच दिया था तुमने
जब भी याद आती है उसपे नज़र
चली जाती है
निशानिया छोड़ने की आदत तो
हमेशा से रही है तुम्हारी

एक और याद

जिस अखबार पर जलेबी रख के
खिलाई थी तुमने
वो टुकड़ा अब भी तुम्हारी
उंगलियो की चाशनी से भीगा पड़ा है
ना रद्दी मे बेच सकते है उसे
ना उमर भर वो हमसे संभाला जायेगा

मंगलवार, 23 अक्टूबर 2012

गलतफहमी


दशहरे के दिन रावण को जलाकर
बुराई के खत्म होने की गलतफहमी
ई एम आई पर घर खरीदकर
उसके अपना होने की गलतफहमी
किसी के मुस्कुरा कर मिलने पर
उसके खुश होने की गलतफहमी
एक दिन बदलेगा देश
बदलेगी दुनिया
इस बात की गलतफहमी
वो देश को करा गये आज़ाद
क्योकि उनको भी थी गलतफहमी
उन्हे पता ना था
कि उनके आज़ाद देश मे
गर्भ में ही मरेंगी देवियां
नवरात्रि तो मनेगी
पर दहेज के लिये
रोज़ मरेंगी बेटियां
आज़ाद भारत
में भी बेकसूरो पर चलेगी
कसाब जैसो की गोलियां
वो भी जिये
आज़ादी दिलवाने की
गलतफहमी मे
हम भी जी रहे है
आज़ाद होने की
गलतफहमी में







शुक्रवार, 15 जून 2012

कब तक हो...

आफिस मे मुझे देर तक
बैठे देख किसी ने पूछा
कब तक हो
तो जवाब निकला
पता नही
पूछने वाला तो
ये सुनकर
चला गया
लेकिन मेरा ये जवाब
मेरे लिये ही एक सवाल छोड़ गया
कि वाकई कब तक हू मै
ये कैसे कहू मैं
क्योकि इसका मेरे पास
नही है कोई
जवाब
हर रोज सुबह उठकर
सोचना कि कैसा होगा मेरा
ये नया आज और दिल मे होता है
थोडा सा
बीते कल का एहसास
साथ ही होती है आने वाले कल से
थोडी सी आस
बस इसी इंतजार मे
चली रही है मेरी सांस
पर ये सवाल बड़ा गहरा है
कि कौन है वो जिसके पास
है इसका जवाब
जिसमे छिपा है मेरे जीवन का राज
अब जब कोई तुमसे पूछे कब तक हो
तो सोचना जरूर कि
कब तक के लिये उसने बांधी है तुम्हारी डोर
ना जाने कब, कंहा किस मोड़ पर
खिचंने वाली है ये डोर
क्योकि कब तक हो तुम
इसका जवाब तो नही है
किसी के पास



उफ ये बेचैनी

ये बेचैनी हमे जीने नही देगी और बेचैनी चली गई तो शायद हम ही ना जी पाये तेरे इश्क मे सुकून कभी मिला ही नही बे-आरामी मे रहने की ये आदत ...