मंगलवार, 21 नवंबर 2017
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उफ ये बेचैनी
ये बेचैनी हमे जीने नही देगी और बेचैनी चली गई तो शायद हम ही ना जी पाये तेरे इश्क मे सुकून कभी मिला ही नही बे-आरामी मे रहने की ये आदत ...
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वो जो मेरे हिस्से का आसमां तुमने चुरा लिया था उसे कुछ वक्त के लिये वापस चाहता हूं मै बहुत दिनो से चांद देखने की मेरी ख्वाहिश अधूरी है क...
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वो तेरी खुमारी का ही था असर जो ताउम्र रहा वरना मयखानो से तो कई बार गुज़रा हूं मै पहली बार इतने भीतर तक उतरी है वरना तस्वीरे तो कई और भी...
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सिमट गई है मेरी दुनिया पहले के टेलीफोन से अब के सैलफोन तक तब के टाइपराइटर से अब के लैपटॉप तक मिट गई है दूरिया पहले के चरण स्पर्श से अब के आर...
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