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उफ ये बेचैनी
ये बेचैनी हमे जीने नही देगी और बेचैनी चली गई तो शायद हम ही ना जी पाये तेरे इश्क मे सुकून कभी मिला ही नही बे-आरामी मे रहने की ये आदत ...
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वो जो मेरे हिस्से का आसमां तुमने चुरा लिया था उसे कुछ वक्त के लिये वापस चाहता हूं मै बहुत दिनो से चांद देखने की मेरी ख्वाहिश अधूरी है क...
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अब तो याद ही नही है कि कैसे जीते थे हम कुछ आदते ये ही भुला देती है कि उनके बिना लगता कैसा था।
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तेरी आँखो मे ऐसे डूबे है कि अब तक उबरे ही नही कुछ बीमारियां उमर भर की होती है फिक्र तो उस दिन की है जिस दिन ये जां जायेगी ये बीमारियां...
1 टिप्पणी:
मौत रूह की कहाँ होती है!!!
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